दिव्यांगता और टेक्नालॉजी
जीवन का लगभग तीन चौथाई हिस्सा उन संसाधनों को इकट्ठा करने के प्रयास में बीतता है जो यदि उसे ना भी मिले तब भी उसका जीवन प्रकृति पर आश्रित रहते हूए सुचारू रूप से चल सकता है जैसे यदि किसी व्यक्ति के पास साइकिल नहीं है तो भी वो अपने पैरों पर चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकता है पर वो अपने साथी को साइकिल पर सवार होकर कहीं जाते हुए देखता है तो स्वयं के लिए भी एक सायकिल की इच्छा करता है और उसे प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करता है। दिव्यांगता क्या है जब कोई व्यक्ति अपनी किसी जन्मजात शारिरिक या मानसिक कमी या जीवन के किसी हिस्से में किसी हादसे या अप्रिय घटना के कारण उत्पन्न हुई स्थाई शारिरिक या मानसिक कभी के कारण अपने जीवन के कार्यों का सुचारु रूप से समाधान नहीं कर पाता या अपने जीवन कि मूलभूत जरुरतें पूरी नहीं कर पाता तो उसे हम दिव्यांगता कहते हैं। दिव्यांग व्यक्ति के जीवन का संघर्ष अतिरिक्त सुविधाएं या वस्तुएं जुटाना ना होकर अपने जीवन कि मूलभूत सुविधाओं को प्राप्त करने को लेकर है जैसे खाने के लिए भरपेट रोटी, तन ढकने के लिए कपड़ा और रहने के लिए मकान ,पर यह भी कहना उचित होगा कि सभी दि...